समाज के गायक कलाकार

स्वर्गीय श्री गिरधारीलाल जी चोयल

आकावाणी भजन गायक एवं अभिनय कलाकार संगीत के क्षेत्र में अपने सुरीलों कंठ से मारवाड़, मेवाड़, गोडवाड़, मालवा और दक्षिण भारत में भक्ति रस की सरिता बहाकर लोक-भजन गायक और अभिनय कलाकार के रूप में प्रसिद्धि पाने वाले स्वर्गीय श्री गिरधारीलालजी चोयल का जन्म पाली जिले के अटबड़ा गाँव में एक साधारण किसान परिवार में श्री रूघाराम जी चोयल के घर सन् 1965 को हुआ। माता श्रीमती जिमनादेवी के स्नेह-आँचल में पहलकर बड़े हुए श्री चोयल ने एस.डी. राजकीय महाविद्यालय-ब्यावर से वाणिज्य वर्ग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आपका शुभ-विवाह अटबड़ा में सीरवी समाज के यशस्वी कोटवाल श्री भबूतराम जी पंवार की पुत्री कमलादेवी के संग हुआ। दाम्पत्य जीवन में आपके एक पुत्र सुरेन्द्र जो भारतीय सेना में झांसी (उ.प्र.) में सेवारत है तथा एक पुत्री सरिता है। विद्यार्थी जीवन से ही आपकी संगीत और अभिनय में विशेष रूचि रही। अटबड़ा के प्रसिद्ध भजन गायक सूरदास जी को अपना गुरु मानकर भजन गायक और लोक कलाकार के रूप में विशेष नाम कमाया। आकाशवाणी के साथ आपने आडिया/विडिया केसेट्र्स पर अनेक कार्यक्रम देकर अपनी संगीत-प्रतिभा का परिचय दिया और एक लोक कलाकार के रूप में यश-कीर्ति प्राप्त की।

‘श्री जवाहर कला केन्र्द-जयपुर’ द्वारा सम्मानित श्री चोयल ने ‘विजय केसेट्र्स’ सोजत सिटी से एक गायक कलाकार के रूप शुरुआत करते हुए हाल म्हारा जीवड़ा सत री संगत में… की शानदार प्रस्तुति दी। आपने पाली व जोधपुर के प्रसिद्ध केसेट्र्स संस्थान में गायक व अभिनय दोनों रूप में अपने प्रोग्राम देकर ख्याति प्राप्त की। जो इस प्रकार है-

विजय केसेट्र्स – पैसो रौल मचावै….।
कृष्णा केसेट्र्स – श्री आईमाता की बेल, जमना तट पर आयो हाऊ और नेनीबाई रो मायरो।
मधुर गीत केसेट्र्स – अमरापुरा की गाड़ी, दही हबड़ को….।, कानुड़ा लाल जावा दे जमना री तीर…।
युकी केसेट्र्स – पूनो भुत व लोफर रोल मचावे…..।
राजन केसेट्र्स – आमरस व मीराँबाई रा भजन।

बिलाड़ा के अक्षय साउण्ड व बालाजी साउण्ड पर अपनी जीवन्त भजन गायक और नृत्य कला द्वारा मनभावन शानदार प्रस्तुतियाँ देने वाले श्री चोयल का ह्रदय गति रुक जाने से 26 जुलाई 2016 को आकस्मिक निधन हो गया। समाज को एक ख्वाती प्राप्त लोक कलाकार, भजन गायक और भक्तिभाव से पृरित व्यक्तित्व को सदा के लिए खो दिया। समाज में आपकी कमी सदैव खलती रहेगी। संगीत के सुर-नायक स्वर्गीय श्री चोयल को हार्दिक श्रध्दांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शान्ति और परिजनों को सम्बल प्रदान करें।

श्री महेंद्रसिंह चोयल

जीवन के अन्य पक्षों के विकास के साथ-साथ सीरवी समाज में कुछ लोगों ने कलाकार के रूप में भी दूर-दूर तक ख्याति प्राप्त की है। कवि, लेखक व कलाकार की कोई अपनी गृहसीमा नहीं होती है। कला ही उनकी पहचान होती है।

समाज के कुछ ज्ञात प्रमुख कलाकार निम्न हैं :-

महेंद्रसिंह पुत्र श्री चंद्रसिंह चोयल, ग्राम अटबड़ा के हैं। इन्होंने बी.कॉम , सी.पी एड. वी बी. एड, शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में यह सीरवी समाज द्वारा संचालित “दीवान रोहिताश्व विद्या मंदिर”अटबड़ा में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं । यह गत 12 वर्षों से कला के क्षेत्र में है इनका क्षेत्र संगीत व नृत्य है यह गायक कलाकार है इनके स्वरचित कैसेट निम्न हैं :-

(1) आईजी माताजी महीमा
(2) पैदल चलता-चलता जै बोले आईमात की
(3) आई माता रा भजन
(4) कन्दोरो घडा़ दे
(5) सोना री झूमरीया
वी.सी.डी मधुर गीत कैसेट भी इन्होंने बनाया है जिसमें प्रमुख हैं:-
“पैदल चलता-चलता जय बोलो आई माता की” इस कैसेट के 10,000 से अधिक सेट जनता के माध्य पहुंच चुके हैं। इनके साथ अन्य कलाकारों ने भी सहयोग किया है इनका प्रमुख उद्देश्य श्री आई माता के उपदेशों का प्रचार करना वह प्रसार करना और धार्मिक भावनाओं को जागृत करना है।

श्री मुकेश काग

किसी विद्धान ने लिखा है अमावस्या किस माह में नहीं आती, थकावट किस रहा में नहीं आती। इस संसार में बताए तो कोई, समस्या किस रहा में नहीं आती।।

समाज के कर्मठ कार्यकर्त्ता, मिलनसार समाज सेवा में सदैव सक्रीय श्री मुकेश सीरवी का जन्म 7 जुलाई 1994 को विरपुरा माताजी ग्राम पाली में साधारण किसान परिवार में पिता श्री हरजीराम सीरवी के घर माता श्रीमती कन्या बाई को कोख से हुआ। आपने सन् 1997 में आपकी प्राथमिक शिक्षा आपके गाँव विरमपरा में की। इसके बाद आपने श्री पाशर्वनाध जे ने विद्यालय वरकाणा में दाखिल हुये वहा आपने सम्पूर्ण पढ़ाई B.B.A की आपको बचपन से ही संगीत में रूचि रही लेकिन आपको क्षेत्र के लिए पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ा, आपने B.B.A. उत्तीर्ण की एवं इसके पश्चात महाराष्ट्र के पुणे शहर आ गये। वहां पर आपने मेडिकल स्टोर में नोकरी करने लगे। आप सामाजिक धार्मिक कार्य कर्मों में जागरण सतसंग के प्रोग्राम अपनी मधुर वाणी से भजन प्रस्तुत कर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोल लेते थे। आपने ऐसे कही कार्यक्रमों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आपकी मुलाक़ात अजीज से हुई आप अपने दोस्त की सलाह व मार्ग दर्शन पर चलते हुये आपने एक खुद का एल्बम किया जो पुरे राजस्थान में छा गया। आपने एल्बम का नाम रखा (सीरवी लागे घणेरो फुटरो) इस एल्बम ने आपको एक नयी पहचन दिलायी इसके बाद आपने 3-4 और एल्बम तैयार किये आपकी इस मधुर वाणी से आपके कही फैन बने आपकी मधुर वाणी से सम्पूर्ण भारत में आपने कई स्टेज प्रोग्राम में भी भाग लिया। आपका पहला एलम्ब (सीरवी लागे घणेरो फुटरो) के अलावा आपने काफी एल्बम भी बनें। आपने राजस्थानी गानों के अलावा पंजाबी गानो में भी अपनी मधुर आवाज से कही प्रोग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पंजाबियों का दिल जित लिया। आपका आगामी प्रोजेक्ट हिन्दी (Hindi) और मराठी (Marathi) एल्बम जो अभी बनकर तैयार हो रहे है। इसके साथ साथ आप राजस्थानी सिनेमा में आपका अभिनय भी जल ही राजस्थानी सिनेमा घरों में धूम मचाने आ रहा है। आपके संगीत जीवन में आपके आदर्श श्री शंकर जी टांक की अहम भूमिका रही आपने सन् 2009 (Hero Honda)सा.रे.गा.मा.पा. में भी प्रस्तुति दी। आपका पहला एल्बम की सफलता के लिए (Best Singer & Year) का अवार्ड मिला।

संपर्क सूत्र – 7020 975 589

श्री निलेश शांतिलाल जी पड़ियार

संगीत के क्षेत्र में अपनी मधुर आवाज से मालवा-निमाड़ एवं राजस्थान में शादी-पार्टी में ऑरकेस्ट्रा प्रोग्राम एवं महिला संगीत,स्कूल कॉलेज व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में संचालन,भजन संध्या व सुंदरकांड द्वारा गायक कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले
निलेश पड़ियार(सिर्वी) का जन्म झाबुआ जिले के झकनावदा गॉव में एक साधारण परिवार में श्री शांतिलाल जी पड़ियार के घर सन 1994 में हुआ।
प्रारम्भिक शिक्षा की शुरुआत सन 1997 में नर्सरी कक्षा से झकनावदा में हुई।
एवं सन 2010 में कक्षा 10वी उर्तीण करने के बाद पढ़ने के लिए रतलाम गए वहा से आगामी कक्षा 11 वी एवं 12 वी की पढ़ाई पुरी की।
12 वी सन 2012 में पास कर अपनी विद्यालय की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद 2012 में ही 1 साल तक पी.एम.टी. परीक्षा की तैयारी के लिए इंदौर गए लेकिन उसमें सफल नही हो पाए। जिसके बाद 1 साल तक वासन आई केयर हॉस्पिटल में नोकरी की।
एवं 2014 में अपनी आगे की पढ़ाई के लिए रतलाम शिफ्ट हुए। जहाँ से अभी बी.एच.एम.एस. डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे है।
संगीत का शौक बचपन से ही था पहले गाँव के स्कूल में हमेशा किसी भी कार्यक्रम में भाग लेते थे व ढपली बजाकर खुद भजन या गीत की गा कर सभी का मन मोह लेते थे।
फिर गाँव मे ही स्वयं द्वारा एक सुंदरकांड मंडल बनाकर संगीतमय सुंदरकांड बिना साउंड के करते थे।
जब इंदौर से रतलाम शिफ्ट हुए तब यहा इन्होंने अपने खुद का एक ग्रुप बनाया जो कि आज माही म्युजिकल ग्रुप रतलाम के नाम से मालवा निमाड़ में बहुत चर्चित है।
इस ग्रुप द्वारा अपने करियर की शुरुआत 8 जुलाई 2014 को आलोट में एक शादी समारोह में प्रोग्राम देकर इस ग्रुप एवं अपने संगीत करियर की शुरूआत की।
ओर इस ग्रुप द्वारा 8 जुलाई 2018 को ग्रुप के 4 साल पूरे होने तक 150 प्रोग्राम पूरे कर लिए।

श्री सुरेश जी गहलोत

कला जीवन उर्जा का महासागर है जब अंतश्‍चेतना जागृत होती है तो उर्जा जीवन को कला के रुप में उभारती है। कला जीवन को सत्‍यम् शिवम् सुन्‍दरम् से समन्वित करती है। इसके द्वारा ही बुद्धि आत्‍मा का सत्‍य स्‍वरुप झलकता है। कला उस क्षितिज की भॉंति है जिसका कोई चोर नहीं। इतनी विशाल इतनी विस्‍तृत ।अनेक विधाओं को अपने में समेटे। तभी तो कवि मन है संगीत के क्षेत्र में अपनी सुरीली कंठ (आवाज) से मारवाड़ और दक्षिण भारत में लोक भजन में प्रसिद्वि पाने वालें श्री सुरेश जी गहलोत का जन्म 10 मार्च 1985 को गांव बड़गांवड़ा तहसील सुमेरपुर जिला पाली मे एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ। माता हन्जादेवी व पिता श्रीमान भीकाराम जी पुत्र श्री देवाराम जी गहलोत के यहाँ हुआ। आपके पिताजी कोटवाल थे। बढेर के कामकाज के साथ-साथ मिस्त्री का कार्य भी करते थे। आपके दो भाई ओर तीन बहने भी है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ न थी – आपने सरकारी स्कूल में मात्र पाँचवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी

इसके बाद आपके पिता जी के पैर (पांव) की बीमारी की वजह से आपको महज़ 11 वर्ष की उम्र में घर सँभालने की व खेती के काम की ज़िम्मेदारी आपके कंधो पर आ गयी। संगीत गायन के क्षेत्र में तो आपकी रुचि बचपन से ही थी।

आपने समय के साथ हैदराबाद की ओर अपनी जीविका को आगे बढ़ाने की लिए प्रस्थान किया। वहा पर आपने सोने के आभूषण बनाने का काम शरू किया। सन 2002 में आपके पिता जी का देहांत हो गया। बादमें आपने खुद ही सोने के आभूषण बनाने वाली दुकान का शुभारंभ किया। उसी के साथ भजनों की ओर मोह होने की वजह से लोगो के साथ मिल-कर आपने धीरे-धीरे अपना कदम गायन की गहराइयों तक बढाया। बादमें आपने भजन संध्या के लिए आवश्यक सामान खरीदा। इसी दौरान आपकी शादी 27-04-2008 को गांव ढोला के धन्नाराम जी हाम्बड़ की पुत्री प्रियंका हाम्बड़ के संग हुई। आपके एक पुत्र व एक पुत्री भी हे।

सन 2009 में राजा मोरध्वज एलम्ब के गाने भी गाये। साथ ही गोगाजी, तोलादे रानी, ऐसा कलयुग आएगा, कच्छबो ने काच्छबी आदि भजन मन मीत कैसेट सुमेरपुर में भी काम किया। इन्होंने खुद का एक एलम्ब निकाला जिसमे केसर बरसे रे बिलाड़ा, बिलाड़ा में जावणा, बिलाड़ा नगरी थारो देवरो जैसे गानों को गाया। साथ ही फागण आयो जी मेहमान, सररर आईजी रे नाम रो, बरस-बरस मारा इन्दर राजा जैसे हिट गाने भी गाये। वर्तमान में आपकी गिनती राजस्थान के बेसुमार गायक कलाकारों में होती हैं। आपकी प्रत्येक जागरणों में लाखों की संख्या में श्रोता शामिल होते हैं और आपके रसीले भजनों से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। सिगंर =सुरेश जी सिरवी गेहलोत बङगावङा पोस्ट लापोद तहसील सुमेरपुर ज़िला पाली राजस्थान फोन नं 6375417750

श्रीमती पुष्पा जी गहलोत

संगीत के क्षेत्र मे अपनी सुरीली आवाज से राजस्थान मे प्रसिद्धि पाने वाली पुष्पा सीरवी का जन्म 20 जुलाई 1995 को गाव पिपलाद तहसील – सोजत जिला – पाली मे सिरवी परिवार मे हुआ! माता डगरी देवी व पिता कुन्नाराम जी पुत्र भीयारामजी गहलोत के यहा हुआ! पिताजी शुरू मे पाली मे कपङो का काम करते थे! बाद मे शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ने से पाली मे काम बंद कर पिपलाद मे फैन्सी की दुकान का काम शुरू किया!

पिताजी अस्वस्थ रहने की वजह से आप दुकान का काम सम्भालने लगी ! आपके दो भाई और 1- धन्नराज गहलोत. 2 – कमलेश गहलोत एक बहन 3 – अनिता गहलोत है। आप परिवार मे सबसे बड़ी होने के कारण परिवार की पुरी जिम्मेदारी आपके कन्धो पर आ गई! आपने कक्षा सातवीं तक पढाई करके सन् 2007 में स्कूल छोड़कर दुकान व , सिलाई का काम करने लगे। संगीत मे आपकी बचपन से ही रूचि रही ! स्कूल मे भी सभी प्रोग्राम मे आप गायन करते थे ! गांव मे भी सभी प्रोग्राम मे भाग लेने लगे ! पिताजी की सहायता से आपने 18 वर्ष की उम्र मे प्रोग्राम की शुरुआत की ! शुरू मे बहुत-सी कठिनाईयो का सामना करना पड़ा,धीरे-धीरे संगीत क्षेत्र मे आपने अच्छा नाम कमाया!

इसी के दौरान आपका विवाह 18 अप्रैल 2018 को सान्डिया गांव के मोहन जी सिन्दङा के पुत्र रमेश जी सिन्दङा के साथ हुआ !

आपने किशोर सुमन एल्बम मे – ‘ थे ध्यावो बिलाङा री आई ने ‘ गाना निकाला! आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. अद्भुत गायिकी के दम पर संगीत की दुनियां में सिक्‍का जमा चुकी पुष्पा छोटे शहर से आने के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से य‍ह मुकाम हासिल किया। अपनी सुरीली आवाज की बदौलत राजस्थान की बेटी पुष्पा ने संगीत क्षेत्र मे अपनी सुरीली आवाज से खास पहचान बनाई!

संपर्क – पुष्पा सीरवी गहलोत  9460827105

कलाकार श्री मांगीलाल सीरवी का जीवन परिचय

कलाकार श्री पुखराज सेंणचा

मेहनती सरल स्वभाव एवं सदा हंसमुख रहने वाले श्री पुखराज सेंणचा भगत का जन्म .01.08.1975 को सोजत तहसील ग्राम पिपलाद बगड़ी नगर बेरा भगतों का बिछुड़ियाँ के एक साधारण किसान परिवार स्व.श्री कानारामजी सैणचा के घर माता श्रीमती तुलसी बाई की कोख से हुआ। आपने सन 1988 में 10 वीं तक शिक्षा ग्रहण की। बचपन से ही आप शिक्षा व संगीत में बहुत रूचि रखने लगे गये थे । आपने सन् 1984 में आपके प्रथम भजन आपके गुरु श्री मान दानारामजी एवं श्रीमान सारारामजी काग बेरा नवोड़ा उदेका की सद्प्रेरणा से प्रस्तुत किया। इसके बाद श्री गंगा गिरिजी सोजत रोड इसके पश्चात् आप की मुलाकात श्री स्व. गुरुदेव श्री रामनिवास राव से हुई श्री राव एवं कालूरामजी बिकरनिया की सद्प्रेरणा लेकर आप आगे बढ़ते गये। इसके बाद आपने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा अपनी धुन में ही भजनों की प्रस्तुतियां देते रहे। आपके परिवार वाले भी आपके इस शौक से चिंतित होने लगे लेकिन आप अपने गायन में मस्त रहे धीरे धीरे आपके माता पिता भी आपके गायन को लगाव से देखने व सुनने लगे व आपको आगे बढ़ने की सद्प्रेरणा देने लगे। आपका प्रथम एल्बम सन 1991 मे रिलीज हुआ उस समय वो ज्यादा पब्लिक सिटी नहीं होने के कारण फलोप हो गया लेकिन आपने हिम्मत नहीं हारी और आपके गुरुदेव की प्रेरणा से आगे बढ़ते रहे और आपने प्रथम वीडियो एल्बम सन 01.06.2018 को जय कारो आई माता रो को रिलीज किया एवं 05.07.2018 को मेलो खरनालिया में लागो रिलीज हुआ।

सन में आपका शुभ विवाह ग्राम पानवा जिला बड़वानी मध्यप्रदेश के निवासी श्री आशारामजी चोयल की पुत्री श्रीमती पिंकी देवी के संग हुआ। आपके सफल दाम्पत्य जीवन में दो पुत्रियों दिव्या एवं नीतू के पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आपने अपने बच्चों को लाड़-प्यार के साथ पाल पोसकर बड़ा किया और शिक्षा के साथ ही अच्छे संस्कार भी दिए। आप वर्तमान में चेन्नई में निवास कर रहे हे । आपका चेन्नई मे प्रतिष्ठान इलेक्ट्रिकल एवं हार्डवेयर की दुकान हे !

  कलाकार श्री भरत पंवार

किसी विद्वान ने लिखा है –
सूरज कहता नहीं किसी से हम प्रकाश फैलाते हैं।
बादल कहता नहीं किसी को, हम पानी बरसाते हैं।
बातों से नहीं अपितु कार्यों से नर पहचाने जाते हैं।
डींग मरते रहते कायर, कर्मवीर विजय पा जाते हैं।

पंवार कुल के कुल दीपक श्री भरत पंवार पिता श्री करनाराम जी पंवार की आँखों के तारे एवं माता श्रीमती कमला बाई के लाडले दुलारे का जन्म 1-07-1991 ग्राम अटबड़ा नयापुरा बास तहसील सोजत सिटी जिला पाली में हुआ। आपने प्राथमिक शिक्षा ग्राम अटबड़ा में ही 7वीं तक की शिक्षा सन 2005 उत्तीर्ण की। इसके पश्चात आप बिजनस के शिलशिले में चेन्नई आ गये। श्री पंवार तीन भाई – बहनों में से दूसरे स्थान पर है। आपके पिता श्री ग्राम अटबड़ा में मेडिकल का व्यवसाय कर रहे है। श्री पंवार बचपन से ही भजन गाने के शौकीन थे। सर्वप्रथन चेन्नई कात्तन्कोल्तुर में भजन गाने की शुरुआत की इसके बाद धीरे-धीरे भजन मण्डली में भी जाने लागे। श्री भरत ने सर्वप्रथम बिलाड़ा नगर आईमाताजी भिराजे इसके पश्चात लिलो-लिलो रे गोड़लो रामदेवजी रो इत्यादि भजनों की सुथिंग की। श्री पंवार गौ माताजी के सच्चे भक्त है पंवार श्री कहते है की जब भी कही भजन सन्ध्या में भाग लेते है वहा की दी गई राशि का खर्च निकाल कर बच्चे हुए पैसे गायों के चारे इत्यादि के लिए दान में दिया जाता है।

आपके सम्मान में बस दो शब्द ही कहूँगा

चोट खाकर रो पड़े वह आदमी नादान है,
लड़खड़ाते गैर पर हंसना बड़ा आसान है।
थाम जो हाथ ले, गिरते आदमी का,
आदमी होता वही महान है।

पीहू सीरवी

कला की कोई उम्र नहीं होती है कला तो उनके पास होती है
जिनके हौसलों में जज्बात ओर बुलंदीया आसमां को छूती है कल अकसर उनके पास होती है

इसी तरह संगीत कला के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाने वाली मालवा की माटी की की नन्ही सी बेटी पीहू सीरवी ग्राम गंधवानी ने अपने बाल्यकाल से ही संगीत के क्षेत्र में एक नई उड़ान भर ली थी इस नन्ही सी बेटी ने इस तरह से अपनी प्रस्तुति दी की हजारों लोग के दिल पर अपना नाम लिखवा लिया संपूर्ण मालवा क्षेत्र में ही नहीं अपितु भारत वर्ष के कई क्षेत्रों में अपनी प्रस्तुति दी चुकी पीहू सीरवी जिंदगी ए संगीत सफर में धीरे धीरे अपने मुकाम की ओर बढ़ते जा रही है वह कहते हैं ना कि हुनर हिरासत में मिलता है उसी तरह पीहू को भी अपने पूज्य दादाजी बालाजी सीरवी पवार से मिली बालाजी सीरवी पंवार (दादाजी) भी गाने का बहुत ही सौक रखते थे वह अपने समय में एक बहुत ही अच्छे गायक और राष्ट्रभक्त रहे पीहू सीरवी के पिता श्री अंतिम जी सीरवी का व्यवसाय कृषि से प्रारंभ हुआ फिर सन 1996 में मनावर में एक छोटा सा ऑटो गैरेज प्रारंभ किया  वर्तमान में अंतिम जी अपने गैरेज के मालिक है अंतिम जी पूर्व में पेट्रोल पंप पर प्रारंभ किया था परंतु किसी कारणवश पना पेट्रोल पंप बंद कर दिया वर्तमान अपने ग्राम गंधवानी में एक ऑटो गैरेज चलाते हैं पीहू सीरवी ने 5 साल की उम्र में गाना प्रारंभ कर दिया था सर्वप्रथम उन्होंने माँ सरस्वती के मंदिर अपनी स्कूल में सर्वप्रथम प्रस्तुति दी थी ततपश्चात पीहू कोअपने संगीत ए सफर को उम्मीदों की नई किरण आएगी जिन किरणों की रोशनी के रूप में मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में अपना पहला कार्यक्रम विनोद जी मुकाती के परम् आशीर्वाद से सफल हुआ  इस मंच के बाद पीहू को “स्वर संगम गरबा मंडल” बड़वानी में एक शुभ अवसर मिला जिससे पीहू का हौसला और भी बढ़ा ओर उसके जज्बातों में एक नई ऊर्जा आई पीहू को लगा कि मैं और भी अच्छा कर सकती हूं तो पीहू ने अपना संगीत अभ्यास प्रारंभ किया और उसने इस अभ्यास के बाद में एक बड़े मंचों की और अपना कदम रखा
इसी तरह पीहू ने मां अहिल्या की नगरी इंदौर में “प्रीतमलाल सभागृहा” मैं अपनी प्रस्तुति दी इस प्रस्तुति से पीहू का वर्चस्व बढ़ गया जिससे एक नहीं पहचान हासिल की इस पहचान से पीहू को इंदौर में “लाभ मंडपम” में अपनी प्रस्तुति देने का एक बहुत ही अच्छा शुभ अवसर मिला तत्पश्चात पीहू ने “जाल सभागृह इंदौर” में एक बहुत ही अच्छा प्रोग्राम किया पीहू सीरवी ने इसी तरह क्रमबद्ध अलीराजपुर, सेंधवा,बालीपुर (मध्यप्रदेश) जैसे अन्य जगह पर अपनी सुंदर सुंदर प्रस्तुतियां देकर यह दिखा दिया की एक नन्ही सी कलाकार के अंदर भी आसमा को छूने के जज्बात होते हैं इसी कड़ी में पीहू ने अपने मासा जी विनोद जी मुकाती द्वारा “श्री 1008 गजानन महाराज जी बालीपुर धाम” बड़वानी मध्यप्रदेश को समर्पित एक बहुत ही सुंदर संगीतमय एल्बम बनाया इस एल्बम का नाम पुष्पांजलि है इस एल्बम के भजन Youtube पर NGM Music चैनल पर है यह समस्त गीत अपने मासाजी विनोद जी मुकाती और अपनी बुआ जी सुमन काग के द्वारा लिखे गए है तत्पश्चात पीहू सीरवी को एक ऐसा मंच मिला जिस मंच की उम्मीद भी नहीं थी परंतु अपनी कला और हुनर के दम पर नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाय मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के ग्राम बोरूद में “श्री आई माताजी प्राण प्रतिष्ठा” के शुभ कार्यक्रम में गुजरात की सुप्रसिद्ध गायिका किंजल दवे के साथ मंच पर “मां तू कितनी अच्छी है” गाने पर अपनी प्रस्तुति देकर हजारों लोगों के सामने इस नन्ही कला को प्रस्तुत किया जिससे मंच पर उपस्थित गुजराती गायक किंजल दवे भाव विभोर हो गई और कहने लगी इस नन्ही कलाकार पीहू में अपना बचपन देख रही हू नन्ही सी लता मंगेशकर के रूप में संगीत सफर में एक छाप छोड़ने वाली पीहू सीरवी को इस मंच से को बहुत प्यार और समर्थन मिला श्रोताओं के स्नेह के बदौलत अपनी मंजिल की ओर उड़ान भरने लगी ओर  यह सिलसिला यहीं नहीं थमा इसके बाद पीहू सीरवी ने अपने सीरवी बंधु RDC media सहयोगी दुर्गाराम जी चौधरी के माध्यम से पीहू को गरबे गीत रिकॉर्ड करने का मौका मिला कुछ समय बाद “मां रिकॉर्डिंग स्टूडियो” के माध्यम से पीहू ने निम्न गीत रिकॉर्ड किये
“ऊंचा मंदिर ये थारा धाम”
“माना नि वान ना थाय ”
“नवरात माँ अम्बा की”
जैसे एल्बम बनाएं इस पर मां आई जी और बालीपुर बाबाजी की ऐसी कृपा रही किस की एक बात एक मंच मिलने लगे ओर पीहू को हर मंच से सम्मान और स्नेह मिलता रहा साल 2018 में इंदौर में भादवी सुदी बीज महोत्सव कार्यक्रम में बुलाया गया इंदौर के इस कार्यक्रम में पीहू ने मंच से मां सरस्वती वंदना और गरबे के गीतों की प्रस्तुति देकर समस्त श्रोताओं आश्चर्यचकित कर दिया इस मंच से भी पीहू को बहुत ही स्नेहा मिला  इसके बाद पीहू को 1 जनवरी 2019 को गंधवानी में भागवत कथा के आयोजन में स्वागत गीत में अपनी प्रस्तुति दी और उसी दौरान उस मंच से पीहू ने कई सुंदर प्रस्तुतियां प्रस्तुत की जिसमें सुदामा चरित्र “ओ मेरे यार सुदामा रे” की बहुत ही शानदार प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया

इसी सिलसिले को बरकरार रखते हुए “सीरवी समाज सम्पूर्ण भारत” चाहता है की यह नन्ही सी कलाकार बड़ी होकर एक लता मंगेशकर के रूप में कई मंचों पर अपनी प्रस्तुति देकर सीरवी समाज का नाम रोशन करें और भारतवर्ष में ही नहीं अपितु विदेशों तक अपने माता पिता और परिवार ओर समाज राष्ट्र का नाम रोशन करें साथ ही भारतवर्ष में बसे क्षत्रिय समाज की जय शुभ कामना है कि पीहू सीरवी एक सफल और श्रेष्ठ गायिका बने

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