सीरवी समाज परगना समिति

अपनी आराध्य कुलदेवी मां सीरियल जी की असीम कृपा और आशीर्वाद से अपना सीरवी समाज अपने पूर्वजों द्वारा समाज के संचालन के लिए बनाई गई प्रथाओं, मान्यताओं, लोकाचारों व मान्य-मर्यादाओं का आज तक पालन करता रहा हैं।अन्य समाजों की अपेक्षा अपने समाज में सरल रिती रिवाज है जिनका पालन सर्वसाधारण व्यक्ति बी आराम से करता हुआ अपना सामाजिक जीवन जी सकता है समाज के संगठन की मान्य धुरियों यथा -खूंटियां पंच गण, ग्राम सभा ,परगना समितियों और महासभा द्वारा समाज में प्रचलित रीति-रिवाजों व प्रथाओं में समय-समय पर बदलाव कर उसे समय के अनुसार नया स्वरूप प्रदान करने का अनेक बार प्रयास किया। जिसे समाज ने तहेदिल से स्वीकार कर उसे लागू भी किया। जो प्रशंसनीय है और अन्य समाजों के लिए भी अनुकरणीय रहा है। समय ने करवट बदली। समाज में शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। आर्थिक की स्थिति में चमत्कारी परिवर्तन आया। दक्षिणी भारत में जाकर स्वजातिय बंधुओं ने व्यापार क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर अर्थार्जन किया। समाज ने प्रगति की नई रोशनी प्राप्त की। समाज के युवा पीढ़ी और बुद्धिजीवी वर्ग के अन्य समाज के व्यक्तियों से संपर्क बढ़ने से उनके मन में भी समाज में प्रचलित कुछ ऐसी मूढ़- मान्यताओं व और परिपाटियों में बदलाव लाने तथा खर्चीले रीति-रिवाजों को समय के अनुसार परिवर्तित करने का चिंतन शुरू हुआ। समाज के मान्य पंचों ने इस आवश्यकता को समझा और ‘एक समाज-एक नियम’ के तहत सामाजिक संगठनों का विशाल अधिवेशन बुलाकर समाज में प्रचलित कुरीतियों, अनावश्यक परीपाटियों,दुव्र्यसनों के सेवन पर रोक लगाने हेतु चिंतन-मनन करने का मानस बनाया। समय के प्रचंड विवेक से समाज को बचाए रखने तथा भौतिकता की लुभावनी चौकाचौध से दूर रहकर युवा पीढ़ी को सरलता, सादगी और धर्मा अनुकूल आचरण करने की और प्रेरित करने के लिए कुछ सर्वमान्य नियम बनाने का निश्चय किया। किसी ने ठीक ही कहा हैं।- ” समय बलवान जानकर जो व्यक्ति, जाति-समाज अपने रीति-रिवाजों लोग व्यवहारों में समय के अनुरूप सुधार कर लेता है, समय उन्हें अपना सहगामी सखा बना लेता है। दिनांक 27.10.02(रविवार) व 28.10.02(सोमवार) के दिन समाज-सुधार का पवित्र भाव मन में संजोकर ‘सीरवी समाज परगना समिति-बिलाड़ा,जैतारण,रायपुर ओर (पूर्व व पश्चिम)’ के समस्त पदाधिकारी गण सबंधित परगनाओ के विभिन्न गांवों के खुटिया- पंच गण कोटवाल, जमादारी,समाज के बुद्धिजीवी और गणमान्य स्वजातिय बंधू ‘ सीरवी समाज ग्राम सभा बगेची- बिलाड़ा,उचियाडा के प्रांगण में समाज हित चिंतन मनन करने के लिए निमित समारोह में पधारे। इस महासम्मेलन की अध्यक्षता सीरवी समाज की अनुभवी व जागरूक पंच श्रीमान दोलाराम जी मादावत( अध्यक्ष,परगना समिति-रायपुर) ने की। इस महासम्मेलन में समाज के प्रचलित कुछ ऐसी प्रथाओं पर बारी-बारी से चिंतन मनन-आरंभ किया गया, जो समाज में कुरीतियों व खर्चीली प्रथाओं का रूप धारण कर समाज के अस्तित्व तक को चुनौती देने लग गई थी। 2 दिन चले गहन चिंतन-मनन तर्क- वितर्क व मंथन के बाद अनेक सर्वमान्य प्रस्ताव सर्व सम्मति से समाज-सुधार के निमित्त पारित किए गए। एक तरफ जा अफीम सेवन पर लगी पाबंदी जरूर कुछ अमलदारों को बेचैन कर रही होगी, तो दूसरी तरफ घोड़े पर तोरण ना बाँदने और शादी-विवाह में वीडियोग्राफी न करने के निर्णय समाज के युवा वर्ग की उस उड़ान को रोकने का प्रयास किया होगा, जो आधुनिकता की अंधी दौड़ में धन का अपव्यय करने का कार्य माना जाता था। पर करें क्या! समाज सर्वोपरि है। सबके हित के लिए व्यक्तिगत मित्रों को त्यागना ही सामाजिकता की प्रथम निशानी है। इस महासम्मेलन में लिए गए निर्णय जरूर समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे। केवल सभा-सम्मेलन कर प्रस्तावों को तालियां की गड़गड़ाहट के बीच पारित करने से ही लक्ष्य प्राप्ति नहीं होती। उन्हें समाज में पूरी तरह क्रियान्वित करने में ही अपन -सब की कड़ी परीक्षा हैं। ‘एक हाथ से ताली नहीं बजती हैं।’ समाज के सभी लोग अपने घर, मोहल्ले, गोत्र,भाईपा,ग्राम और परगने में पांचो परगना समितियों द्वारा सर्वसम्मति से पारित समाज सुधार के इन नियमों की दृढ़ता से पालन करेंगे और अन्य स्वजातिय बंधुओं को भी इस हेतु प्रेरित करेंगे, तभी मां सम्मेलन की सार्थकता व समाज की संगठनात्मक एकता का परिचय मिलेगा।

एक समाज-एक नियम” समर्पित इस दो दिवसीय महासम्मेलन में प्रत्येक बिंदु पर गंभीर चिंतन-मनन के बाद जो प्रस्ताव सदन ने सर्वसम्मति से पारित किए। उनका विवरण इस प्रकार हैं:-

1. लड़का-लड़की के संबंध (सगाई) का रजिस्ट्रेशन गांव के बड़ेर में अनिवार्य रूप से करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन में लड़का-लड़की का संबंध खुला है या आमने-सामने, इसका उल्लेख किया जाय। रजिस्ट्रेशन का शुल्क5/- रुपये रखा गया है। रजिस्ट्रेशन रजिस्टर में दोनों पक्षों के हस्ताक्षर करवाना आवश्यक होगा।

2. शिक्षा कोष हेतू प्रतिवर्ष प्रतिघर के हिसाब से 5 रुपये बास का खूंटिया पंच वसूलकर परगना समिति में जमा करायेंगे तथा परगना समिति को ही इस कोष को खर्च करने का अधिकार होगा।

3. लड़की की शादी पर होने वाली समाज के मुख्य रस्म यानी डोरिया पर लड़के वाले भवार के रूप में 40 रुपये रखेंगे व लड़की वाले उसमें10रुपये जोड़कर वापस देंगे। विवाह का डोरिया लड़की वालें से 20 रुपय प्रति चंवरी एवं नाता का डोरिया का भवार एक समान ही 40 रुपये रहेगा। उसमें भी लड़की वाले 10 रुपये जोड़कर वापस देंगे। लेकिन नाता का डोरिया हेतु लड़की वालों से10 रुपये लेकर यह राशि ग्राम सभा के कोष में जमा करायेंगे ।

4. दोरा पर बारहवां तक बीड़ी-सिगरेट व अफीम के सेवन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। इनका सेवन ना तो जाजम पर होगा और ना ही घर में किया जायेगा। दोरा पर रात्रि जागरण में भी इनके सेवन करने पर पूरी तरह से रोक लगाई जाती हैं।

5. शादी-विवाह व समस्त प्रकार के उत्सव आयोजन अर्थात् आणा-मुकलावा,नाता,दोयटण,जडुला उतारना,माताजी की बीज,अनन्त चौदस व पूर्णिमा के उघापन( उजवणा) और ढूंढ सहित अन्य उत्सवों पर अफीम व शराब के सेवन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाता है।

6. दोरा पर बैठने के लिए आने वाले उसी गांव के आदमी औरतों को खाना नहीं खिलाया जायेगा। साथ दोरा पर चाय सुबह 10 बजे तक ही चलेगी तथा शाम को सूर्यास्त होने के बाद ही चाय वापस पिलाने का निर्णय लिया गया है। मृत्यु के दिन अंतिम संस्कार के बाद मुंह ऐंठाने( खारी रोटी) के पश्चात, बारहवां के दिन तागा तोड़ने के बाद तथा छाया बिखरने के बाद चाय नई पिलाने का निर्णय लिया गया है।

7. किसी भी उत्सव पर समाज का कोई व्यक्ति शराब पीकर आता है हुड़दंग करता है तो उसे ग्राम स्तर पर दंडित किया जायेगा।

8. शारदा एक्ट के अनुसार पालन करते हुए समाज में नाबालिग लड़के-लड़कियों विवाह नहीं होगा अर्थात् बाल-विवाह पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाता है।

9. औरत की मृत्यु पर ओरना पीहर पक्ष वाले ही लायेंगे। बेटों-पोतों के ससुराल वाले औरना नही लायेंगे।

10. बारहवां पर खाना दाल-बाटी ही बनाना होगा।बाफला-बाटिया,घी में फोड़वा बाटिया,लापसी व अन्य मीठे व्यंजन का भोजन बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।

11. शोक प्रथा(शौक मिटाना) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। पहले आने वाले त्यौहार यहां चांदनी बीज पर भाईपा व सगे रिश्तेदार मिलकर पुराने रीति-रिवाज के अनुसार घाट बनाकर शौक मिटाने की रस्म अदा करेंगे।

12.माथा धोवन के लिए केवल बहन-बेटी को ही पीर वाले ले जा सकेंगे। ससुराल पक्ष में से अन्य किसी को भी माथा धोवन हेतू ( देराणी,जेठानी,ननद व अन्य )साथ में नहीं ले जायेंगे ।।13.बाहरवां के बाद गंगा प्रसादी व गंगा जल बर्ताने पर भोजन रूप में सिर्फ दाल-बाटी ही बनाने की अनुमति होगी, अन्य पकवान बताने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है।

14. समाज में दहेज-प्रथा देने लेने का जो प्रयास शुरू हो रहा है। उस पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाती हैं। दहेज न तो कोई देगा और न ही कोई लेगा। लड़की की सहेलियां द्वारा भी कोई वस्तु अब नहीं दी जा सकेगी।

15. झडूला उतारने तथा बीज, अनंत चौदस व पूर्णिमा का व्रत उजवने पर केवल ससुराल वाले ही जंवाई व बहन-बेटी के लिए कपड़े/वेश लायेंगे। साथ ही सगे भाई ओरना ला सकेंगे।भईपा वाले ओरना न लावे और न ही भईपा में ओरना देवें। बहन-बेटियों आनिया-धोतियाँ लायेगी। साथ में आने वाले भाईपा के लोग केवल नारेल दे सकेंगे।

16. मायरा पक्का एक ही बार भरा जायेगा। दूसरी बार केवल जंवाई-बहन-बेटी के ही कपड़े ले जायेंगे। पास वाले भाईपा को ओरना-वेश नहीं देने का निर्णय लिया गया है। बेटी-जंवाई के माता पिता के लिए वेश दे सकेंगे तथा सगे भाई बहन-बेटी को ओरना दे सकेंगे तथा भाईपा वाले केवल शोभ दे सकेंगे। दूसरी बार थाली में सोना, चांदी, जेवरात व नकद राशि पीहर वाली अपनी बहन-बेटी के लिए रख सकेंगे।

17. विवाह में दुल्हे धोती या पेन्ट कोई भी पहन सकेंगे,लेकिन साफा अनिवार्य होगा।

18. कंवरों-भंवरों के विवाह संबंधी विशेष रीति-रिवाज जैसे ही घोड़े पर तोरण बाँदना,जलामली आरती उतारना,पड़ला और दुल्हन को चुनरी ओढ़ाकर चंवरी में बैठाना आदि पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा कर इन्हें बंद किया जाता है। घोड़े पर तोरण बाँदना सबके लिए बंद क्या जाता है। अब केवल पाटिया लगाकर ही तोरण बाँदा जायेगा ।

19. एक गांव से दूसरे गांव जाकर बंदोली निकलवाने की रुढी को बंद किया जाता है। बंदोली में नाचने के लिए एक गांव से दूसरे गांव जाने पर अब प्रतिबंध लगाया जाता है। साथ ही बंदोली में अवारनी अब कौन रूप से बंद की जाती हैं।

20. शादी में बैंड बाजे ला सकेंगे तथा अपनी इच्छा अनुसार फोटोग्राफर लाकर फोटो शिक्षा सकेंगे। लेकिन शादी में रिसेप्शन वीडियोग्राफी और अवारनी पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।

21. ओलुन्दी के वेश के लिए 250रुपये , विवाह में ओरना के 20रुपये तथा वेश के लिए 50रुपये की राशि तय की जाती हैं।

22. लड़के-लड़की की छूटतनी( संबंध-विच्छेद,) की पंचायती हेतु मौकानुसार सुनवाई कर दंडित किए जाने का निर्णय लिया गया है।

23. संबंध-विच्छेद का निर्णय है बिना (हवरी) अर्थात गहना सहित लड़का-लड़की का संबंध दूसरी जगह नहीं करें। ऐसा करने पर वह आदमी आम न्यात का दोषी होगा और उसे चारों समितियों के द्वारा हवरी मांग का निर्णय करवाने का प्रस्ताव लिया गया है।

24. लड़का-लड़की के संबंध- विच्छेद के मामले में प्रथम निर्णय दोनों गनायत आपस में बैठकर, दूसरा निर्णय दोनों पक्षों के भाईपा में, तीसरा निर्णय ग्राम सभा स्तर पर, चौथा निर्णय अपनी परगना समिति में जाकर प्राप्त करेंगे। वहां पर भी यदि पंचायती का निर्णय नए निकले तो वह आदमी महासभा में जा सकेगा।

25. समाज में धर्मेला(भाई-बहन-बेटी) करने की परंपरा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाता है।

26. लड़की का नाता किसी भी वार को किया जा सकेगा। इसमें बॉक्स व कपड़े दे सकेंगे। नाता में आधा डोरिया की रस्म अदा की जायगी। नाता पर शादी का रूप नहीं दिया जावें।

27. समाज की जो मुख्य रस्म -“डोरिया”,, चाहे वह विवाह का डोरिया हो, या नाता का, उस जाजम पर समस्त पंचो व सगे-संबंधियों के लिए साफा पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। अर्थात् ‘डोरिया’ पर साफा पहनकर बैठना अनिवार्य होगा।

28. बाहरवां अर्थात मृत्यु की जाजम पर यानि बारह दिन तक गुटखा,जर्दा आदि नहीं रखा जाय। इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है।

29. बच्चियों के संबंध में किसी प्रकार का पैसा न लिया जाय। पैसा देने वाला और लेने वाला, दोनों पक्ष जाति-समाज- न्यात के दोषी होंगे। कन्या के संबंध मैं पैसे लेने पर समाज में पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाता है।

30. बुढ़ापे की मृत्यु पर जो रोने की पुरानी रूढ़िवादी परंपरा है, उस पर भी रोक लगाई जाती हैं। औरतें हरजस गाया करेंगी।

31. मृत्यु पर आटा-घी नियमानुसार अपनी बहन-बेटी के वहां ले जा सकेंगे।

32.हवेरी बीनणी संबंधी निर्णय चारों समितियों( बिलाड़ा,जैतारण, रायपुर, और सोजत )( पूर्व व पश्चिम)में ही किया जाय। पीहर-बेटी व ससुराल पक्ष के अलावा शेष तीनों समितियों के चुनिंदा सदस्यों को भी आमंत्रित किया जायेगा।

33. लेंहरका में कुंवारा सगपण होने पर जंवाई की वेश, भिंयाण जी के ओरना ले जा सकेंगे। यदि बच्ची ससुराल आ रही है तो बेटी-जंवाई के वेश तथा सासू के ओरना ला सकेंगे। साथ ही थाली में रोकड़ रकम वह चांदी जेवरात रखे जा सकेंगे। सगे भाई-बहिन-बेटी के लिए ओरना ला सकेंगे। जबकि नजदीक के भाईपा वाले शोभ रा नारेल दे सकेंगे।

समाज-सुधार की दृष्टि से ऊपर ले गये समस्त निर्णय पंचो परगनों के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों की आम सहमति से गहन विचार-विमर्श के बाद लिए गए। इन नियमों की अवेलना करने पर समाज द्वारा जो दंड राशि तय की गई, वो एक विशेष पुस्तिका में प्रकाशित कर परगनों के सभी बडेरों में भिजवा दी गई है। इसका विवरण पत्रिका के पिछले अंक में प्रकाशित हो चुका है। वैसे तो महासम्मेलन में पारित प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी वाली एक पुस्तिका समस्त ग्राम सभाओं, खूंटिया-पंचो, प्रत्येक गांव की कोटवाल- जमादारी व परगना समितियों के पास भिजवाई जा रही हैं। जिससे समाज के समस्त बंधुओं को सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी मिल सके तथा समाज में उन्हें क्रियान्वित करने का भी मार्ग प्रशस्त हो सके ।
प्रिय स्वजातिय बंधुओं! समाज-अपना है और अपन सब-समाज के हैं। अपन-सब जैसा चाहें, अपने समाज को वह स्वरुप प्रदान कर सकते हैं। अपन सब इस सीरवी समाज रूपी बाग के वे महकते पुष्प है, जो अपने श्रेष्ठ आचरण, सद्कार्यों और संगठन से इस समाज की सुरभि को चहुँ और फैला सकते हैं। एकता में ही बल है। यदि अपन-सब मिलकर आपसी सहयोग व विश्वास से इन पारित प्रस्तावों को समाज में लागू करने का प्रयास करेंगे, तो इसमें सबका ही हित होगा। समाज की मर्यादा व गरिमा भी बढ़ेगी। अपनी सामाजिक एकता भी स्पष्ट रूप से झलकेगी।

अतः आप सबसे हार्दिक निवेदन है कि अपने-अपने ग्राम क्षेत्र व समिति में इन प्रस्तावों को पूरी तरह से क्रियान्वित करने में सहयोग प्रदान करें। समस्त खूंटिया पंचगण, ग्राम सभा के पदाधिकारी गण, कोटवाल,जमादरी तथा परगना समितियों के समस्त पदाधिकारी व सदस्यों का भी यह दायित्व होगा कि वे अपने-अपने क्षेत्र में इन प्रस्तावों को कठोरता से लागू करवाने की समुचित व्यवस्था करने का सक्रिय प्रयास करें। समय के बदलते परिवेश में निरंतर पड़ते अकालों से कुंओं का जलस्तर दिन-प्रतिदिन नीचे जा रहा है। अपनी आर्थिक की स्थिति डगमगा रही है। जहां घर-परिवार का भरण-पोषण भी दूभर हो रहा हो। ऐसे में अपन- सब समाज में प्रचलित कुरीतियां, दुव्यरसनों के सेवन और खर्चीली प्रथाओं का दामन कब तक पकड़े रहेंगे। समय के अनुसार हमें अपने समाज को नई दिशा प्रदान करनी होगी । तभी हम अपने घर-परिवार व जाति-समाज को सदैव सुखी संपन्नव निरोग रख पायेंगे। आओ! समाज सुधार के इस महायज्ञ में आप सब अपना वैचारिक, रचनात्मक, क्रियात्मक और संगठनात्मक सहयोग देकर खूंटिया पंचो, ग्राम सभा और प्रज्ञा समितियों को संबल प्रदान करते हुए समाज को नई दिशा दें।
अंत में हम तो यही कहते हैं:- जाग सको तो जागो,ओ मेरे स्वजातिय बंधुओं।
फिर मत कहना कि हमें जगाया नहीं । समाज-सुधार कि इस प्रक्रिया में मां भगवती ‘श्री आईजी’ का पावन आशीर्वाद अपने साथ हैं। आशा और विश्वास के पात्र । हम हैं आपके स्वजातिय बन्धु ।।

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