महेंद्र सीरवी (आगलेचा) खारड़ी, मारवाड़ जंक्शन
एक सशक्त समाज की नींव केवल ईंट और पत्थर से नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र और उसके गुणों से बनती है। जब तक हम अपने व्यक्तित्व में श्रेष्ठ गुणों का समावेश नहीं करेंगे, तब तक एक आदर्श समाज की कल्पना अधूरी है। अक्सर समाज सेवा की बात आने पर युवा सोचता है, “यह काम मैं ही क्यों करूं?” सच तो यह है कि समाज को आपकी जरूरत है, और आपकी यह सकारात्मक सोच ही बड़े बदलाव का माध्यम बनेगी।
आज का युवा अपनी पढ़ाई और करियर की प्रतिस्पर्धा में इतना उलझ गया है कि वह समाज से कटता जा रहा है। विडंबना यह है कि हम एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक तो हैं, लेकिन मतदान जैसे बुनियादी कर्तव्य से भी परहेज करते हैं।
याद रखें: यदि आप एक ईमानदार और समाज-हितैषी प्रतिनिधि नहीं चुनते, तो आप समाज की बेहतरी की शिकायत करने का अधिकार भी खो देते हैं। मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।
देश और समाज की दशा तब सुधरेगी जब नीति निर्धारण में युवाओं की सक्रियता बढ़ेगी। यह तभी संभव है जब:
युवा आगे आएं: अपनी ऊर्जा और नई सोच को राजनीति के मंच पर साझा करें।
बुजुर्गों का मार्गदर्शन: समाज के वरिष्ठ और अनुभवी लोग युवाओं को केवल दर्शक न बनाकर उन्हें राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित करें।
युवाओं को यह समझना होगा कि करियर आपकी आजीविका है, लेकिन समाज आपकी पहचान है। जब व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज के प्रति सेवा का जज्बा जुड़ेगा, तभी हम एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर पाएंगे।
*”उठो! अपनी सफलता की कहानी में समाज के गौरव को भी शामिल करो।”*
करियर के साथ समाज की भी सोचें युवा: बदलाव की नई नींव*