श्री घीसा राम चौधरी सीरवी

किसी विद्वान ने लिखा है कि..
यदि अम्बर नहीं होगा तो चाँद सितारे क्या करेंगे?

यदि समुद्र नहीं होगा तो किनारे क्या करेंगे?
यदि मन मन्दिर में श्रद्धा की ज्योति नहीं जली तो..
मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर व गुरुद्वारे क्या करेंगे?

सरल सौम्य स्वभाव, स्पष्ट वक्ता, व्यवहार कुशल, न्यायप्रिय, धार्मिक प्रवृति तथा सबको साथ लेकर चलने की अदभुत क्षमता वाले जुझारू एवं कर्मठ समाजसेवी श्री घीसा राम चौधरी सीरवी का जन्म 15 जुलाई 1966 को राजस्थान में पाली जिले की तहसील मारवाड़ जंक्शन, के अन्तर्गत आने वाले ठाकरवास गाँव के साधारण किसान परिवार में हुआ। पिता श्री केरा राम जी के लाड़-प्यार एवं माताश्री रतनीदेवीजी के स्नेहमयी आँचल में संस्कारो की लोरी सुनकर पले-बढ़े श्री घीसाराम चार भाई-बहिनों में आप श्री पांच भाई-बहनों के मध्य हैं। आपके दो बड़े भाई श्री नेनाराम किसान एवं श्री मांगीलाल जी किसान खेती कर कर रहे अपने बड़ों को आदर-सम्मान देना और छोटों पर स्नेह व अपनत्व की वर्षा करना आप के स्वभाव की विशेषता रही है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा राजकीय आर्दश उच्च प्राथमिक विद्यालय ठाकुरवास में हुई, जहाँ से आपने पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही आप में शिक्षा के साथ ही साथ संगीत के प्रति गहरी रूचि रही। तथा कक्षा छः से ग्यारह तक सुमति शिक्षा सदन राणावास में अध्धयन सदा Class Topper भाषण रत्न आचार्य तुलसी दास महामहिम राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने सम्मानित किया उत्कृष्ट खिलाड़ी खोखो और हॉकी में प्रतिनिधित्व किया, व दशवी बोर्ड में 23वा स्थान नीड कम मेरिट छात्रवृत्ति मिली वही पाली बांगड़ महाविद्यालय से स्नातक किया विद्यालय एवम महाविद्यालय हर स्तर पर आप श्री ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, और राजकीय महाविद्यालय अजमेर से M,A, English और राजनीति विज्ञान में किया तथा अजमेर राजकीय महाविद्यालय में उपाध्यक्ष रहे अंग्रेजी राजनिति विज्ञान के अलावा मनोविज्ञान और दर्शन शास्त्र में भी अधिस्नातक M,A, किया और आप श्री ने राजस्थान विश्व विद्यालय से LL,B, की डिग्री ली तथा तृतीय श्रेणी शिक्षक से नोकरी सन 1992 मै शुरू कर व 1996 मे द्वितीय श्रेणी शिक्षक बने 1999 मे आप पहली बार सामाजिक धार्मिक स्थल jijiwad dayalana की प्राण प्रतिष्ठा में चढ़ावे की बोलियों से समाज सेवा में प्रवेश किया तत्पश्चात आई माता जी की छोटी बड़ी प्रतिष्ठा में सेवा दी बैंगलोर शहर को छोड़ बाकी सभी जगह अवसर मिला है mp के कुक्षी से मद्रास की भूमि , महाराष्ट्र , गुजरात आंध्रा प्रदेश कर्नाटक तेलंगाना हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड सभी जगह चढ़ावे की बोलिया भी लगाई है और भजन संध्या भी की है भजन संध्या की कैसेट कृष्णा महेश एवम yuki मे रिकॉर्ड है बिलाड़ा में जावना आई ने मनवाना खूब प्रसिद्ध huya tha कृष्ण बलराम के अलावा रामदेव बाबा और चेतावनी और गुरू महिमा भी खूब चले है रामदेव बाबा के गुड़िया की नामचीन प्रतिष्ठा आपने ही करवाई है सरकारी सेवा में 2006मै पद्दोनत्ती सिर्फ समाज सेवा के लिए छोड़ी dalyana ट्रस्ट और नव युवक मंडल का पंजीयन कराया मै संस्थान का सह सचिव हूं 2015 मे व्याखाता अंग्रेजी पद पर join कर vice principal khinwara और आज भी खिंवाड़ा महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में प्रिंसिपल का पद संभाल रहे हैं संचालक एवम भजन कलाकार के रुप में डाया लाना जीजी बड़ से शुरू होकर भगवान पूरा मालसबावडी, कंटालिया सारंगवास हरियामाली बोरनाडी मुसलिया मामावास सुरायता कुशाल पूरा कानेचा सीवास घेनरी देवली भीमालिया कराड़ी banta कलापीपाल की ढाणी इंड्रो का ढाणी जोजावर खिंवाड़ा सहित लगभग 125मंदिर में भाग लिया प्रवास मै मद्रास के ट्रिप्लीकेन पड़डपे तंडियार पेट सहित maddipakkam , चिक बंगलोर विकोटा हैदराबाद में jiddimetala अलमसगुडा उप्पल समाशाबाद , पुणे की बीबावेबादी , कसरवादी,visharantbadi ,badgavshery , गुजरात की अंकलेशर, भरूच नवसारी और गांधीधाम जेसे कही बड़े शहरों में आप श्री ने भजनों की प्रस्तुतियां दी

केशरदात्री अखण्ड ज्योति स्वरूप माँ श्री आईजी एवं माँ श्री सरस्वतीजी की अपाऑर कृपा दृष्टि श्री चोयल और इनके परिवार पर सदा बनी रहे तथा आपके हृदय में उच्च विचार और समाज सेवा की ज्योति सदैव प्रज्ज्वलित रहे।

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