इनका जन्म पीपलिया कलाँ (पाली) नामक गांव में लालारामजी मूलेवा के घर विक्रम् संवत् 1938 में हुआ। इन्होंने गायें चराते हुए पढ़ना-लिखना सीख लिया। कृषि के साथ ये दूकानदारी का कार्य भी करते थे। ये देश के स्वतन्त्रता आन्दोलन में बड़ी रुचि रखते थे। जब जयनारायण व्यास द्वारा “प्रजा-परिषद्” का संगठन कार्य चलाया जा रहा था तब ये कांग्रेस के साधारण सदस्य बने। प्रजा सेवक और तरूण राजस्थान आदि पत्रों के ग्राहक बने और अन्य लोगों को ग्राहक बनाया ।तत्पश्चात् गेनाराम जी कांग्रेस तथा प्रजा परिषद् के सक्रिय सदस्य रहे। गाँवों में कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में तथा सामन्तशाही व्यवस्था का विरोध करने मे अहम् भूमिका निभाई। ये किसान सभा व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के निडर होकर सहयोग देते थे। डाकुओं को एक गुट ने शिकायत के संदेह में विक्रम सवंत 2003 को उनकी हत्या कर दी। श्री गेनारामजी स्वतन्त्रता सेनानी समाज सेवी व समाज सुधारक थे।
समाज सुधारक- स्व. गेनारामजी मुलेवा