प्रथम पुण्यतिथि पर डॉ. राठौड़

सीरवी समाज के जाने माने समाज सेवी, शिक्षाविद, कथावाचक, डॉक्टर साहब के नाम से प्रख्यात श्री पुखराज जी राठौड़ का दिनांक 30 जनवरी 2017 को असामयिक निधन हो गया। एक आकस्मिक,अकल्पनीय घटना ने समाज के इस महान व्यक्तित्व को हमसे छीन लिया।बडेर बास बिलाड़ा में एक साधारण परिवार में दिनांक एक जनवरी 1952 में पिता श्री जोधाराम जी राठौड़, माता रतनीदेवी की कोख से श्री पुखराज जी राठौड़ का जन्म हुआ। किशोरावस्था में ही आपके पिताजी का स्वर्गवास हो गया। जीवन में पारिवारिक, आर्थिक विषमताओं के बावजूद आपने तीन बहिनों के साथ माताश्री की सेवा की। दसवीं तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद आपने पाली में नेत्र रोगनिदान में अनुभव प्राप्त किया। आपने बिलाड़ा में अपनी आजीविका की शुरुआत कमल ऑप्टिकल्स फर्म से की। आपका विवाह श्रीमती भंवरी देवी पुत्री श्री पुरखा राम जी काग बेरा कागो का मगरिया, बिलाड़ा के संग हुआ। आपने दोनों पुत्र पवन और जितेन्द्र और पुत्री पूजा का लालन-पालन किया।\\\”सूरज न बन सको तो जीवन में ,दीपक बनकर चलता चल\\\” उक्त पँक्तियों को चरितार्थ करते हुऐ समाज की सेवा को आपने अपने जीवन में हथियार बनाकर सदैव सेवा में तत्पर रहें। आपने 80 के दशक में सर्वप्रथम बडेर युवा मंडल बिलाड़ा की स्थापना कर समाज में सीरवी नवयुवक मंडल की नींव रखी।आप नवयुवक मंडल के हमेशा मार्गदर्शक बने रहें। आपने 1984-85 में समाज के होनहार बच्चो की शिक्षा के लिए भामाशाहो और बुद्धिजीवियों के सहयोग से सीरवी समाज बिलाड़ा में शिक्षा की नींव रखी और सीरवी शिक्षा समिति की स्थापना कर श्री आईजी विद्या मंदिर की शुरुआत की। आप सीरवी शिक्षा समिति के संस्थापक सदस्य और सचिव रहें। आपने सीरवी समाज के साहित्य नक्षत्र सीरवी सन्देश के आरम्भिक दौर में 1986 में सम्पादक का कार्यभार संभाला और त्रैमासिक अंक प्रकाशित कर पत्रिका को गति प्रदान की।

Diwan madhavsing ji

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