आजकल सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने का चलन बहुत बढ़ गया है। यह सिर्फ एक मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि इसने हमारे समाज के सामने कुछ गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जब हमारी बहु-बेटियाँ ‘लाइक’ और ‘फॉलोअर्स’ के लिए अपनी मर्यादा को भूलकर ऐसे वीडियो बनाती हैं, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। यह केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि हमारा समाज अपनी युवा पीढ़ी को सही दिशा नहीं दे पा रहा है। समाज का यह कर्तव्य है कि वह अपने सदस्यों को सही और गलत का फर्क सिखाए। यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपनी बेटियों को इस तरह की अश्लीलता और दिखावे की दुनिया से बचाएं।
*सुरक्षा और सामाजिक खतरे*
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर सुरक्षा भी एक बड़ा खतरा है। कई बार लड़कियाँ इंस्टाग्राम पर अनजान और धोखेबाज लोगों के संपर्क में आ जाती हैं। इन लोगों की मीठी बातों से प्रभावित होकर वे कई बार अपने परिवार और घर को छोड़कर चली जाती हैं। अन्य समाज बंधुओ के साथ विवाह रचा देती हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि वे एक बड़े धोखे का शिकार हो गई हैं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा का विषय है।
इस समस्या का समाधान केवल युवा पीढ़ी को दोष देने से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को मिलकर काम करना होगा। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल के बारे में सिखाएँ और उन्हें इसके खतरों से अवगत कराएँ। उन्हें यह समझाना चाहिए कि इंटरनेट पर जो कुछ भी दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता। इसके साथ ही, हमें अपने बच्चों के साथ एक मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनाना चाहिए ताकि वे अपनी परेशानियों को बिना किसी डर के हमारे साथ साझा कर सकें। यह न केवल लड़कियों पर लागू होता है बल्कि लड़कों पर भी, क्योंकि वे भी इन प्लेटफॉर्म्स के नकारात्मक प्रभावों से अछूते नहीं हैं। सोशल मीडिया को पूरी तरह से नकारने के बजाय, हमें इसका उपयोग जागरूकता फैलाने और शिक्षा देने के लिए करना चाहिए ताकि हमारी युवा पीढ़ी सुरक्षित और सही रास्ते पर रह सके।
*परिवार और समाज को जागृत करना है।*
अगर हम अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो सबसे पहले उनके परिवार वालों को जागना होगा। परिवार ही वह पहली पाठशाला है जहाँ संस्कार और नैतिकता सिखाई जाती है। माता-पिता को अपनी बेटियों को केवल अच्छी शिक्षा ही नहीं, बल्कि अपने सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं से भी जोड़ना चाहिए।
उन्हें यह समझाना होगा कि उनकी असली पहचान उनके चरित्र और आत्म-सम्मान में है, न कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली झूठी प्रशंसा में। परिवार के साथ-साथ, पूरे समाज को भी इस मुद्दे पर एकजुट होना होगा। समाज के बड़े-बुजुर्गों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों को आगे आकर इस प्रवृत्ति के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। हमें मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ हमारी बेटियों को अपनी संस्कृति पर गर्व हो और वे सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बच सकें।
*सीरवी समाज का उदाहरण*
सीरवी समाज जैसी गौरवशाली परंपराओं वाले समाज को अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। क्षत्रिय कुल से होने के नाते, उनका इतिहास सम्मान और साहस का प्रतीक है। महिलाओं को यह समझना होगा कि उनके संस्कार ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति हैं। इंस्टाग्राम पर नाचना या कूदना ऐसा कोई भी काम करना जो उनके पारंपरिक मूल्यों के खिलाफ है, उन्हें शोभा नहीं देता।
यह समय है कि समाज की सभी महिलाएँ, विशेष रूप से युवा पीढ़ी, अपनी सांस्कृतिक विरासत को पहचानें और उसकी रक्षा करें। हमें याद रखना चाहिए कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हथियार भले ही छोड़ दिए गए हों, लेकिन अपनी शक्ति और आत्म-सम्मान को पुनः प्राप्त करना आवश्यक है।
प्रस्तुति:- महेंद्र सीरवी लेरचा