श्री आई माताजी मंदिर, बिलाड़ा: पुजारी पद पर नई जिम्मेदारी का सूत्रपात

बिलाड़ा, राजस्थान: इतिहास के पन्नों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब श्री आई माताजी के पवित्र धाम बिलाड़ा में, लंबे समय से अपनी सेवाएँ दे रहे पूजनीय पुजारी श्री प्रेमाबाबाजी ने मंदिर के मुख्य पुजारी पद से सेवानिवृत्ति की घोषणा की। विक्रम संवत् २०८२, आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि, यानी शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन, उनकी भावभीनी विदाई हुई।
प्रेमाबाबाजी ने अपना पूरा जीवन माँ आईजी के चरणों में समर्पित कर दिया। उनकी निष्काम सेवा और धार्मिक निष्ठा ने न केवल मंदिर की गरिमा बढ़ाई, बल्कि भक्तों के हृदय में भी एक विशेष स्थान बनाया। अब वे गुजरात प्रांत के दिशा जिले में स्थित अपने आश्रम अंबापुर में वास करेंगे, और वहाँ से धर्म प्रचार का कार्य जारी रखेंगे। उनका यह निर्णय आई पंथ के सिद्धांतों और आध्यात्मिक संदेश को दूर-दूर तक फैलाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

मंदिर के भविष्य की बागडोर अब मध्य प्रदेश से आए श्री महेंद्र बाबाजी को सर्वसम्मति से मंदिर का नया मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया है।

बिलाड़ा के समस्त पंचों और परम पूजनीय धर्मगुरु दीवान माधुसिंह जी साहब ने उनके नाम पर सहमति दी, जिसे महेंद्र बाबाजी ने सहर्ष स्वीकार किया। शुभ मुहूर्त में, महेंद्र बाबाजी ने मंदिर की चाबी अपने हाथों में ली और मुख्य पुजारी के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया।

महेंद्र बाबाजी की नियुक्ति से मंदिर परिसर में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है। भक्तों को उम्मीद है कि उनकी अगुआई में मंदिर नए आयामों को छुएगा और धार्मिक गतिविधियों को और अधिक गति मिलेगी। यह क्षण एक पुरानी पीढ़ी के सम्मानजनक विदाई और एक नई पीढ़ी के स्वागत का प्रतीक है, जो भविष्य में धर्म और संस्कृति की मशाल को आगे लेकर जाएगी।

प्रस्तुति- रमेश काग सीरवी
सह संपादक – सीरवी समाज सम्पूर्ण भारत डाॅट काॅम

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