पाली:–तहसील मुख्यालय देसूरी से लगभग 18 किमी एवं रानी से 13 किमी दूर माताजी वारा, सरथूर, उन्दरथल, वीरमपुरा माताजी, वरकाणा और धाणदा के मध्य पंचायत मुख्यालय का बड़ा गांव है दादाई।

तहसील मुख्यालय देसूरी से लगभग 18 किमी एवं रानी से 13 किमी दूर माताजी वारा, सरथूर, उन्दरथल, वीरमपुरा माताजी, वरकाणा और धाणदा के मध्य पंचायत मुख्यालय का बड़ा गांव है *-दादाई*।
छत्तीस कौम की लगभग *ढ़ाई हजार घर की बस्ती में मात्र चारण,जाट और जणवा नहीं है* बाकी सभी जातियों का यहां पर निवास है।
*दादाई में सीरवी समाज के लगभग 300 घर है जिनमें से आधे में 150 घर सेपटा गौत्र* के है अन्य गौत्र में बरफा,काग, परमार,भायल, सानपुरा, गेहलोत, आगलेचा, सोलंकी, मुलेवा, परिहार, देवड़ा और चोयल यहां निवास रत है।
यहां पर श्री आई माताजी मंदिर बडेर बहुत प्राचीन था जिसकी प्राण प्रतिष्ठा लगभग 60-65 वर्ष पूर्व हुई थी जिसकी अधिक जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान समय में बडेर भवन पूरी तरह से समतल कर नये बडेर के निर्माण की तैयारी है।
*सन् 1961 में जिस समय दादाई में नयी बडेर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई थी उस समय आसपास के गांवों में दादाई की बडेर सर्वोत्तम थी एवं लोग देखने तथा दर्शन करने आते थे*। गलियां पक्की होने, सड़क के उंची होने तथा बडेर के नीचे रह जाने पर जल भराव की समस्या के कारण नयी बडेर की आवश्यकता हुई।
श्री आई माताजी का सबसे पुराना पाट जूनी बडेर में आज भी स्थापित है, जहां जमादारी श्री कूपाराम जी सफाजी सेपटा और स्वर्गीय भूदरजी पूराजी सेपटा जमादारी परिवार का वास है
फिलहाल सीरवी समाज भवन में माताजी के पाट की स्थापना की हुई है यहां समाज भवन बहुत भव्य बनाया गया है एवं सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।इस भवन के लिए भूमि पूजन विक्रम संवत २०६६के मिगसर बदी तीज 15/10/2009 को किया गया।
वर्तमान में यहां पर *कोटवाल श्री दरगाराम जी वरदाजी सोलंकी, जमादारी श्री कूपाराम जी सफाजी सेपटा एवं उन्दरथल निवासी सीधे एवं सरल पुजारी श्री मोटाराम जी दूदाजी परमार* अपनी सराहनीय सेवाएं दे रहे हैं।
सरकारी सेवा में यहां से देश की सेवा में रहे, उच्च विचारों के धनी *लांस नायक श्री नारायण लाल जी तेजाजी सेपटा सेवा निवृत्त फौजी* का नाम सर्वप्रथम है। *डाक्टर श्री दिनेश जी कानाराम जी काग एसएमएस जयपुर* में अपनी सेवा दे रहे हैं। *श्री रताराम जी खीमाजी सेपटा कनाडा में सीए* है, श्री मुकेश जी ओगड़राम जी काग पूना में सीए है, श्री मोहनलाल जी दीपाजी सेपटा मुम्बई में सीए और श्री हिमांशु जी कसाजी सेपटा पूना में सीए है। श्री ओमप्रकाश जी छोगारामजी सेपटा अहमदाबाद में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं और श्री राजेश जी हंसाराम जी काग बंगलौर में माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर है। श्री मांगीलाल जी कानाजी सिन्दड़ा जो मूलतः उन्दरथल के है विंगरला में अध्यापक है तथा श्रीमती गंगा देवी अचलारामजी सेपटा दादाई में फीमेल नर्स के रूप में सेवा दे रही है।
राजनीति में दादाई सीरवी समाज से *श्री मगाराम जी हकाजी सेपटा दादाई पंचायत के सरपंच रहे हैं, स्वर्गीय रतारामजी कानाजी सोलंकी सरपंच रहे तथा श्रीमती भंवरी देवी कसाराम जी सेपटा भी दादाई के सरपंच रहे हैं। श्रीमती सुखी देवी लखाराम जी सेपटा उप सरपंच* रहे हैं।
व्यापार व्यवसाय में दादाई से सीरवी बंधु दादाई,रानी, अहमदाबाद, नवसारी, सूरत, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चैन्नई और विदेश में कनाडा में अपने गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
दादाई से सर्वप्रथम दक्षिण भारत जाने वालों में श्री मगाराम जी हकाजी सेपटा रानी और भोलाराम जी मेघाजी सेपटा मुम्बई गये।
ग्राम विकास के कार्य में श्री भोलाराम जी मेघाजी सेपटा द्वारा श्री मोतीबाबा छात्रावास रानी में एक कमरा निर्माण करवाया गया, हिंगलाज गौ शाला में टीन शेड लगवाये गये। श्री पूनाराम जी सफाजी सेपटा द्वारा मामाजी मंदिर पर मार्बल से छतरी निर्माण‌ करवाया गया। श्री जगारामजी वरदाजी सेपटा द्वारा गौशाला को एम्बुलेंस भेंट की गई। सीरवी समाज दादाई द्वारा शानदार श्री आई माता प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया गया।
दक्षिण भारत के संगठनों के पदाधिकारी रूप में *श्री चतराराम जी केनाजी सोमतरा(सानपुरा) वर्तमान में बिबवेवाडी पुणे बडेर के सचिव* है।
श्री आई माताजी धर्म रथ भैल का दादाई में भव्य बधावा किया गया, सभी बांडेरुओं के बेरों पर निवास करने से रात्रि में धर्म सभा स्थगित रखी गई एवं दूसरे दिवस दिन में फौजी साहब के विशेष आग्रह पर धर्म सभा का आयोजन हुआ सभी ने बहुत पसन्द किया एवं प्रसन्नता व्यक्त की।
*श्री सखा महाराज जी सेपटा दादाई के मूल निवासी हैं जिन्होंने श्री जीजीवड़ डायलाना मंदिर में लगभग दो साल अपनी सेवा दी, आपने बडौद में लगभग पन्द्रह बीस साल तक सीता महाराज बगीची में विराजमान रहकर आश्रम का विकास किया एवं वर्तमान में पिछले पांच साल से डायलाना में ही आपने कैलाश आश्रम की स्थापना की है जिसमें अमरनाथ महादेव गुफ़ा बनाई है*।
दादाई में श्री आई माताजी धर्म रथ भैल का एक दिन मुख्य बडेर में ठहराव रहता है दूसरे दिन बेरा जरकावा और तीसरे दिन बेरा लुहारों वाला पर भैल का ठहराव रहता है। इस बार दूसरे दिन बेरा लुहारों वाला पर श्री आशापुरा माताजी मंदिर पर सोमतरा(सानपुरा) परिवार द्वारा भैल को ले जाया गया यहां पर भी भव्य बधावा किया गया रात्रि में धर्म सभा एवं भजनों का कार्यक्रम रहा था।
*दूसरे दिन श्री पकारामजी सोलंकी बेरा जरकावा भैल को अपने बेरे पर ले जाते हैं परन्तु इस बार मात्र दो माह पूर्व आपके युवा पुत्र के सड़क दुघर्टना में असामयिक देहावसान के कारण भैल ले जाने का कार्यक्रम स्थगित रखा गया*।
दादाई गांव के चंहुमुखी विकास और खुशहाली की कामना करता हूं -दीपाराम काग गुड़िया।

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