उदयपुरराजस्थान का एक विश्व प्रसिद्ध एवं खुबसुरत पर्यटन स्थल है जो अपने इतिहास, संस्कृति और अपने आकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है

September 28, 2020
जय मां आईजी री सा। उदयपुरराजस्थान का एक विश्व प्रसिद्ध एवं खुबसुरत पर्यटन स्थल है जो अपने इतिहास, संस्कृति और अपने आकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है। इसे पूर्व के वेनिस के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर अपनी अनेक विश्व प्रसिद्ध झीलों के कारण झीलों की नगरी city of lakes के नाम से…

आये हम सब मिलकर एक बार सभी जीवों के कल्याणार्थ गुरू महाराज से निवेदन करे……

July 4, 2020
सभी सीरवी समाज के बुद्धिजीवियों, पुण्य शालियो को घीसाराम सीरवी बिजोवा का स्नेह भरा रामराम,प्रणाम कल गुरू पूर्णिमा का पावन पर्व है।हम सब इस संसार में आत्म कल्याण के लिये गुरू की चरण का सहारा लेते हैं ।भव सागर से तरण तारण के लिए भी सांसारिक गुरू की आवश्यकता होती है । आज विश्व में…

जयपुर- विद्या सीरवी ने किया सीरवी समाज को किया गौरवान्वित

June 21, 2020
जयपुर- विद्या सीरवी ने किया सीरवी समाज को किया गौरवान्वित किसी ने ठीक ही कहा है......"मुश्किलों में भागना आसान होता है,हर पहलु जिन्दगी का इम्तिहान होता है। डरने वालों को कुछ मिलता नहीं जिन्दगी में, और लड़ने वाले के कदमों में जहान होता है।" अत्यन्त मेहनती, होनहार, अपने दृढ लक्ष्य पर अडीग रहते हुए आगे…

हमें याद रखना हे कि हमारी लड़ाई बिमार से नहीं बीमारी से है।

June 20, 2020
आज हम देख रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात राजस्थान जैसे कई राज्यों में तबाही मचाई है ।वैसे तो हमें कोरोना के बारे में काफी सारी जानकारियां सोशल मीडिया द्वारा मिल जाती है। दोस्तों मैं आपको मेरे द्वारा अनुभव कि हुई जानकारी…

पैदल न चलने देती पल भर भी, हमसफ़र थी जो राह के काँटों की

June 12, 2020
मेरी माँ की सूरत फकीरों सी, जो दे गई लकीरें वाजूदों सी, मैं कितनी बात लिखूँ उसकी, लफ्ज़ खत्म हो जाए अमीरी के। जो अतुल्य दर्द कहा जाता है ज़माने भर में, वो गर्भ का दर्द है माँ के पाले में। जो पानी सूख जाए सर्दी की रातों में, वो तप्त है माँ के पैरों…

हम मंदिर में घन्टी (टंकोर)क्यों बजाते हैं ?

*हम मंदिर में घन्टी (टंकोर)क्यों बजाते हैं?* अक्सर छोटे बङे सभी मंदिरों में प्रवेश द्वार के पास ऊँचाई पर एक या अधिक घंटियाॅ (टंकोर)लटकी रहती हैं ।मन में श्रद्धा-भक्ति और आस्था का भाव लेकर श्रद्धालु मंदिर-प्रवेश करते ही घंटी (टंकोर) बजाता है और फिर भगवान के दर्शन,पूजा-पाठ और प्रार्थना स्तुति के लिए आगे बढ़ता है…

शिक्षा और संस्कारों के अभाव में अवरुद्ध सामाजिक विकास

June 11, 2020
मां भगवती श्री आईजी को नमन करते हुए मैं। अपने विचार सीरवी भाई बहिनों के सम्मुख रखते हुए यह अपेक्षा रखती हूं कि आप इस पर अवश्य मनन करेंगे एक तरफ जहां हमारे सीरवी समाज ने व्यापार व्यवसाय के क्षेत्र में बहुत ही कम समय में आशातीत प्रगति कर एक सुनहरा इतिहास लिखा है, वही…

हम दीपक क्यों जलाते हैं?

हम दीपक क्यों जलाते हैं? अंधकार को हरने की सबसे इकाई 'दीपक ' है ।दीपक हमारी अलौकिकमयी प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है ।युगों- युगों से कुम्हार की चाक से निखरता हुआ मटमैली चिकनी मिट्टी की उपज यह दीपक कठोर अग्नि परीक्षा से गुजर कर एक साधारण सी काया लेकर मानव तक पहुंचता है ।दीपक जीवन…

मंगल परिणय के पश्चात पछतावा क्यों ?

June 7, 2020
कुंवारे को उमावा व परणियो को पछतावा। पता नहीं इस कहावत के पीछे क्या हकीकत हैं या यह कहावत कैसे प्रचलित हुई जो भी कहावत बनती हैं वो अनुभव के आधार पर बनती हैं उन्हें झुठी या मन गढंत ठहराना भी उचित नहीं। कहावतें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षाप्रद होती हैं। अतः चिंतन करने की आवश्यकता…

सही सोच और सावधानी कर सकती है करोना का खात्मा

May 20, 2020
सही सोच और सावधानी कर सकती है करोना का खात्म,-किसी भी बीमारी को दूर करने के लिए, उसके बारे में सही ज्ञान, सकारात्मक सोच एवं स्वस्थ जीवन आचरण आवश्यक है। आज के संघर्ष और तनाव के माहौल मैं, अधिकांश बिमारी साइकोसोमैटिक है। अर्थात ज्यादातर रोग दैहिक कमजोरियों से भी अधिक मानसिक दुर्बलता, नकारात्मकता, तनाव व…

Recent Posts